बाबा लाल दयाल आश्रम में बांटे पूजित अक्षत
दातारपुर,(एसपी शर्मा): स्थानीय बाबा लाल दयाल आश्रम में विश्व हिन्दू परिषद केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य महामंडलेश्वर महंत रमेश दास महाराज की अध्यक्षता में अयोध्या से लाए गए पूजित अक्षत बड़ी संख्या में उपस्थित विभिन्न स्थानों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं को वितरित किए गये। अपने संबोधन में महंत रमेश दास महाराज ने कहा कि धर्म में चावल यानी अक्षत का विशेष महत्व है। देवी-देवताओं को पूजा में अक्षत चढ़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज तक निरंतर चली आ रही है। माना जाता है कि अक्षत के बिना की गई पूजा अधूरी होती है। महंत ने कहा कि अक्षत का अर्थ होता है जो टूटा न हो। शास्त्रों में अन्न और हवन का विशेष महत्व माना जाता है। हिंदू पुराणों में पूजा के समय चावल या अक्षत चढ़ाने का उल्लेख मिलता है, जिसे शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि अन्न से हुए हवन से भगवान संतुष्ट होते हैं। वहीं यह भी माना जाता है कि भगवान को अन्न अर्पित करने से पितृ भी तृप्त हो जाते हैं। वहीं भगवान को हमेशा ऐसे अक्षत समर्पित किए जाते हैं जो खंडित न हो। सनातन धर्म में अक्षत का पूजा के दौरान विशेष महत्त्व है। उन्होंने कहा गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि मुझे अर्पित किये बिना जो कोई अन्न और धन का उपयोग करता है वो अन्न और धन चोरी का माना जाता है। अक्षत यानी चावल को शुद्ध अनाज माना जाता है,इसके पीछे का कारण यह है कि चावल धान के अंदर बंद होता है। जिसे पशु-पक्षी झूठा नहीं कर पाते। एक और मान्यता यह भी है कि प्रकृति में सबसे पहले चावल की ही खेती की गई थी। उस समय लोग भगवान को अक्षत अर्पित करते थे। शास्त्रों में अन्न को ईश्वर को संतुष्ट करने का मुख्य साधन बताया गया है। सबसे ज्यादा शद्ध और पवित्र होने की वजह से अक्षत भगवान को अर्पित किया जाता है। कहते हैं, अक्षत ईश्वर को संतुष्ट करता है। उन्होंने कहा ये अक्षत तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या से लाए गए हैं और अति पवित्र हैं। राम जन्मभूमि में भव्य मंदिर में मूर्ति प्रतिष्ठापना बाईस जनवरी को की जाएगी। इस अवसर पर देपुर, दातारपुर, रकडी़, रैपुर, गोईवाला, चौकी, दलवाली तथा अन्य गांवों में वितरित करने के लिए पूजित अक्षत कलश महंत रमेश दास महाराज ने वितरित किए।

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