वीरों की भूमि पंजाब जिसके कण-कण में है कुर्बानी का जज्बा: ब्रिगेडियर औलख

हिमवीर मनिंदर के बलिदान को नम आंखों से किया नमन

अमृतसर,(राकेश राणा): विश्व के सबसे ऊंचे व दुर्गम क्षेत्र हिमखंड ग्लेशियर में शहादत का जाम पीने वाले सेना की 3 पंजाब रेजीमेंट के सेना मेडल विजेता नायक मनिंदर सिंह का चौथा श्रद्धांजलि समारोह शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की की अध्यक्षता में राजासांसी में उनके निवास स्थान पर आयोजित किया गया। जिसमें रक्षा सेवाएं भलाई विभाग पंजाब के पूर्व डायरेक्टर ब्रिगेडियर सतिंदर सिंह औलख बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए। इनके अलावा शहीद की पत्नी नायब तहसीलदार अकविंदर कौर, बेटा एकमजोत सिंह, ससुर जगतार सिंह, तहसीलदार जगतार सिंह, तहसीलदार नवकीरत सिंह, तहसीलदार जसविंदर सिंह, तहसीलदार अवतार सिंह, बीडीपीओ सितारा सिंह, शहीद लेफ्टिनेंट नवदीप सिंह अशोक चक्र के पिता कैप्टन जोगिंदर सिंह, पुलवामा हमले के शहीद कांस्टेबल मनिंदर सिंह के पिता सतपाल अत्री, शहीद सिपाही जतिंदर कुमार ले पिता राजेश कुमार, हलका इंचार्ज मुखविंदर सिंह, शहीद की यूनिट से हवलदार सुखचैन सिंह आदि ने विशेष मेहमान के तौर पर शामिल होकर शहीद को श्रद्धासुमन अर्पित किए। सर्वप्रथम श्री अखंड पाठ साहिब का भोग डालते हुए रागी जत्थे द्वारा वैरागमयी कीर्तन कर शहीद को नमन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि व अन्य मेहमानों ने शहीद के चित्र समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि समारोह का आगाज किया गया।समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि ब्रिगेडियर सतिंदर सिंह औलख ने कहा कि पंजाब वीरों की भूमि है जिसके कण-कण में कुर्बानी का जज्बा है तथा आज भी हर साल हमारे 15 से 20 सैनिक राष्ट्र की सुरक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे रहे हैं। उन्होंने कहा हिम वीर नायक मनिंदर सिंह जैसे जांबाज सैनिकों के अमूल्य बलिदान का देश हमेशा कर्जदार रहेगा जिन्होंने ग्लेशियर की बर्फीली चोटियों पर अपनी ड्यूटी को कर्तव्य परायणता से निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति देकर देशवासियों को यह संदेश दिया कि एक सैनिक के लिए राष्ट्र सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि वह शहीद परिवारों के त्याग, हौंसले व संघर्ष के समक्ष नतमस्तक हैं जो अपनी सबसे बहुमूल्य दौलत देश पर कुर्बान करने के बाद भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गर्व से सिर उठा कर जी रहे हैं। ब्रिगेडियर औलख ने कहा कि देश के हर नागरिक का यह फर्ज बनता है कि वो शहीदों के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए उनके सपनों को साकार कर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देकर उनकी सोच पर पहरा दें। यही आज के दिन पर मनिंदर जैसे शूरवीरों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कहा शहीद परिवारों का टोल टैक्स माफ करवाने के लिए वह मुख्यमंत्री के ध्यान में यह मामला लायेंगे। ब्रिगेडियर औलख ने लाया कि वह शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के दिल से आभारी हैं जो जगह-जगह इस तरह के समारोह आयोजित कर समाज में देशभक्ति की अलख प्रज्जवलित कर रहे हैं।

बलिदानी पिता से मनिंदर को मिला वतन पर कुर्बान होने का जज्बा-कुंवर विक्की

परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि परिवारिक संस्कारों से ही पैदा होता है शहादत का जज्बा, इन पंक्तियों को नायक मनिंदर ने सही मायनों में चरितार्थ कर दिखाया, क्योंकि उनके पिता नायक सुखदेव सिंह ने भी 1992 में देश की सुरक्षा में दुश्मन से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी तथा इसी बलिदानी पिता की शुरवीरता व अदम्य साहस से प्रेरित मनिंदर में भी वतन पर कुर्बान होने का जज्बा कूट-कूट कर भरा हुआ था तथा परिवार की गौरवमयी शहादतों की परंपरा को चार साल पहले मनिंदर ने भी अपने प्राणों की आहुति देकर कायम रखा। आज सारा देश इस बलिदानी परिवार के समक्ष नतमस्तक है। उन्होंने कहा कि आज की भावी पीढ़ी फिल्मी हीरो को अपना रोल मॉडल मानती है जो देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है, उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि फिल्मी हीरो अगर गल्ती करता है तो उसका रीटेक होता है मगर देश के रियल हीरो हमारे वीर सैनिकों के जीवन में गल्ती की कोई गुंजाइश नहीं होती वो जो भी करते हैं सब लाइव होता है। कुंवर विक्की ने कहा कि नायक मनिंदर सिंह एक बहादुर कमांडो था जिसने 29 वर्ष की अल्पायु में राष्ट्र की सुरक्षा में अपना बलिदान देकर अपना सैन्य धर्म निभाते हुए देशवासियों को यह संदेश दिया कि जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए। इसी लिए एक सैनिक को सच्चा संत सिपाही कहा गया है जिसका एक ही धर्म होता है इंसानियत जिसकी सुरक्षा में वो अपने प्राणों की बाजी लगा असली हीरो का किरदार निभा जाता है। उन्होंने कहा कि वह बलिदानी मनिंदर सिंह के परिजनों को भी दिल से सैल्यूट करते हैं जिन्होंने आज के दिन न सिर्फ मनिंदर बल्कि उनके साथ शहीद होने वाले सिपाही मनीष कुमार, सिपाही डिंपल कुमार व सिपाही वीरपाल के बलिदान को भी सजदा किया है।
पिता की शहादत को बेटे ने किया सैल्यूट, कहा मैं भी बनूंगा फौजी

समारोह में शामिल हर आंख उस समय नम हो उठी, जब शहीद पिता मनिंदर को सैल्यूट करते हुए उनके 9 साल के बेटे एकमजोत ने कहा कि मुझे अपने पापा को खोने का दुख तो बहुत है मगर उनकी शहादत पर गर्व भी है कि मुझे आज लोग एक शहीद के बेटे के नाम से जानते हैं। एकमजोत ने कहा कि मैं भी अपने पापा की तरह एक बहादुर फौजी बनकर उनके सपनों को साकार करूंगा।इस अवसर मुख्यातिथि द्वारा शहीद के परिजनों सहित पांच अन्य शहीद परिवारों को शाल तथा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर ई.ओ जगतार सिंह, सूबेदार सतिंदर सिंह, हवलदार गुरजिंदर सिंह, हलवलदार जोगिंदर पाल, लांसनायक मनप्रीत सिंह आदि उपस्थित थे।

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