शहादत के 56 वर्षों बाद भी बाबा हरभजन सिंह की आत्मा देती है सीमा पर पहरा : कुंवर विक्की
कहा, पिछले 20 वर्षों से घर में प्रज्जवलित है बाबा जी के नाम की आखंड जोत
कपूरथला,(गीता सन्याल राजदार टाइम्स): भारतीय सेना की 23 पंजाब रेजीमेंट के शहीद बाबा हरभजन सिंह की शौर्यगाथा सेना व देश विदेश में बसे हर भारतीय के दिलों में आज भी राष्ट्र पर मर मिटने का जज्बा भरती है तथा उनकी पुण्य आत्मा बलिदान के 56 वर्षों बाद आज भी देश की सीमाओं पर पहरा देती है। इस अमर योद्धा को नमन करने शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के सदस्य बाबा हरभजन सिंह के पैतृक गांव कूकां जिला कपूरथला में उनके निवास स्थान पर पहुंचे, जहां की बलिदानी मिट्टी को नमन कर उन्होंने बाबा जी के छोटे भाई रत्न सिंह व उनके भतीजे बलविंदर सिंह को सम्मानित किया। इस अवसर पर शहीद सिपाही जतिंदर कुमार के पिता राजेश कुमार, शहीद कांस्टेबल मनिंदर सिंह के पिता सतपाल अत्री, इंडियन एक्स सर्विसमैन लीग के ब्लॉक प्रधान सूबेदार मेजर मदन लाल शर्मा।
भाई बोला, यादों में आज भी जिंदा हैं बाबा जी
शहीद बाबा हरभजन सिंह के छोटे भाई रत्न सिंह ने गर्व के आंसुओं के साथ बताया कि उनकी यादों में उनके बड़े भाई बाबा हरभजन सिंह आज भी जिंदा हैं तथा आए दिन वो उनके सपनों में आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता सरदार सिंह का जब देहांत हुआ उस समय बाबा जी 5 साल व वह दो साल के थे। पिता के जाने के बाद मां ने बड़े कष्टों के साथ हमारा पालन पोषण किया। 30 जून 1965 को उनके बड़े भाई बाबा हरभजन सिंह सेना की 23 पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हो गए। जिससे परिवार को खुशी मिली, लेकिन शायद ईश्वर को कुछ और मंजूर था वो खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई, 4 अक्तूबर 1968 को भारत चीन बॉर्डर के नाथुला पास पर गश्त के दौरान उनका पांव फिसल गया और वो गहरी खाई में गिरने से शहीद हो गए। यूनिट के जवानों ने उन्हें बहुत ढूंढा पर वह मिले नहीं। दो दिनों बाद बाबा हरभजन सिंह अपने साथी सैनिक सिपाही प्रीतम सिंह के सपने में आकर उस जगह के बारे में बताया कि वो अमर हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर व राईफल वहां बर्फ में दफन है, जब साथी सैनिकों ने उस जगह पर जाकर बाबा जी को ढूंढा तो उनका पार्थिव शरीर व राइफल उसी जगह मिली जिसके बारे में बाबा जी ने सपने में अपने साथी सैनिक को बताया था।
माँ के सपने में आकर कहा मेरे लिए बनाओ कमरा
बाबा जी के भाई रत्न सिंह ने बताया कि शहादत के बाद भी सेना बाबा जी को हर साल घर छुट्टी भेजती, बाबा जी के लिए बकायदा ट्रेन में सीट बुक करवाई जाती। एक बार जब बाबा जी घर छुट्टी आए हुए थे तो माँ अमर कौर के सपने में आए और कहा कि आप सब मजे से रजाई ओढ़ कर सो रहे हो मगर मैं ठंड में ठिठुरता रहता हूं। जब माँ ने मुझे इस बारे में बताया तो मैने कहा जब वो मेरे सपने में आकर कमरा बनवाने के लिए कहेगा तो ही बनवाऊंगा तो, उसी रात वो मेरे साथ रजाई में आकर लेट गए और कहा मेरे लिए कमरा बनवा कर दो ताकि छुट्टी के दौरान वह आराम से इस कमरे में रह सकें। साल 1985 को हमने उनके लिए कमरा बनवा कर उसमें श्री आखंड पाठ साहब का पाठ करवाया। उसके बाद फिर उन्होंने सपने में आकर कहा कि मुझे खुशी है कि आपने मेरे लिए कमरा बनवाया। रत्न सिंह ने बताया कि 2006 को उनकी माता अमर कौर का देहांत हो गया, उनके जाने के बाद बाबा जी की मिलने वाली पेंशन भी बंद हो गई लेकिन फिर भी हमने अपने बड़े भाई की बलिदान की गरिमा को धूमिल नहीं होने दिया।
सरकारों ने नहीं बनाई बाबा जी की कोई यादगार, परिवार ने खुद बनाया यादगिरी गेट
शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि बाबा हरभजन सिंह शहादत के 56 वर्षों बाद आज भी घोड़े पर सवार होकर देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं। उनकी स्मृति में जहां सेना ने नाथुला दर्रे के पास एक मंदिर बनवाया है। वहां सेना के अलावा देश का आम नागरिक श्रद्धा से नतमस्तक होकर अपने लिए मन्नत मांगता है वहीं पंजाब की समय-समय की सरकारों ने बाबा हरभजन जी के बलिदान को भुला दिया है। उनकी शहादत के 56 वर्षों बाद भी उनके पैतृक गांव कूकां में उनकी कोई यादगार नहीं बनाई न ही गांव के सरकारी स्कूल का नाम बाबा जी के नाम पर रखा गया, जहां तक कि गांव के प्रवेश द्वार पर बने यादगिरी गेट का निर्माण भी परिवार ने अपने खर्चे पर बनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जिला मुख्यालय में बाबा हरभजन सिंह जी की कोई भव्य यादगार बनवानी चाहिए जिसमें उनकी शौर्यगाथा लिखी जाए ताकि भावी पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा ले सके।
फ्लैग मीटिंग में लगाई जाती है बाबा जी की कुर्सी
कुंवर रविंदर विक्की ने बताया कि भारत चीन सरहद पर होने वाली फ्लैग मीटिंग के दौरान चीनी सेना के अधिकारियों द्वारा शहीद बाबा हरभजन सिंह जी के लिए अलग से कुर्सी लगाई जाती है क्योंकि चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों से कई बार कहा कि रात को कोई सफेद कपड़ों में घोड़े पर सवार होकर बॉर्डर पर घूमता है जब भारतीय सैनिकों ने उन्हें बाबा जी के बारे में बताया तब से लेकर उन्होंने फ्लैग मीटिंग में बाबा जी की कुर्सी लगाने की परंपरा शुरू की है जो आज भी जारी है।
जूतों पर अक्सर मिलता है कीचड़
कुंवर विक्की ने कहा बताया कि बाबा हरभजन सिंह सेना के कागजों में बेशक बतौर ऑनरेरी कैप्टन रिटायर हो चुके हैं मगर सेना के लिए वो आज भी जिंदा हैं। उनकी याद में बने मंदिर में उनकी तस्वीर के साथ उनके जूते व बिस्तर भी लगाया गया है और सेना के जवान रोज उनके जूते पोलिश करते हैं कई बार उन्होंने बताया है कि सुबह जब देखते हैं तो बाबा जी के जूतों पर कीचड़ लगा होता है और उनके बिस्तर पर पड़ी सलवटें उनकी मौजूदगी का एहसास करवाती हैं। आम लोगों का मानना है कि बाबा हरभजन सिंह जी आज भी सूक्ष्म रूप से यहां उपस्थित रहकर सरहदों की रखवाली कर रहे हैं।
परिवार के जज्बे को करते हैं दिल से सैल्यूट
कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि वह बाबा हरभजन सिंह के परिजनों के इस जज्बे को दिल से सैल्यूट करते हैं, जिन्होंने बाबा जी के बलिदान की मशाल को आज भी अपने दिलों में प्रज्जवलित कर के रखा है और पिछले 20 वर्षों से परिवार ने बाबा जी की याद में देसी घी की आखंड जोत प्रज्जवलित करके रखी है। इसके अलावा बाबा जी की वर्दी व जूते भी एक विरासत के रूप में इन्होंने संभाल कर रखे हैं।
भतीजा बोला, गर्व है बाबा जी के परिवार का अंश हूँ
शहीद बाबा हरभजन सिंह के भतीजे बलविंदर सिंह ने कहा कि वो बचपन से ही बाबा जी की सेवा को संभाले हुए हैं अगर वो चाहते तो कोई नौकरी कर सकते थे मगर उन्होंने इस सेवा को ही अपना धर्म मान लिया है और बाबा जी के परिवार का अंश होने पर उन्हें गर्व है। उन्होंने कहा कि आज शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने हमारे परिवार का सम्मान कर हमारा मनोबल बढ़ाया है। जिसके लिए हम परिषद के आभारी हैं।

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