पराली वाले खेतों में जुताई करने से बढ़ती है गेहूं की पैदावार : डॉ.कंवलदीप सिंह
कहा, हम सल्फर जैसे तत्व भी नष्ट कर देते हैं, जो इस प्राकृतिक सल्फर उर्वरक से हम अपने खेतों को पहुंचा रहे हैं नुकसान
मुकेरियां,(राजदार टाइम्स): धान की पराली को आग लगाई जाती है तो इससे उठने वाला धूंआ वातावरण को दूषित करता है। उससे कैंसर व अन्य घातक बीमारियों तो बनती ही है साथ ही यह सडक़ हादसों की वजह भी बनता है। इस लिए हमें इस गंभीर समस्या का हल करने के लिए मिलझुल कर प्रयास करने की जरूरत है। इस भयानक समस्या प्रति किसानों को जागरूक करते हुए एडीओ डॉ.कंवलदीप सिंह ने कहा कि पराली जलाने से जमीन से जो गैस पैदा होती है, वह मनुष्य के साथ-साथ जीव-जंतुओं के लिए भी घातक होती है। उन्होंने कहा कि जब इंसान प्रकृति के साथ ऐसा व्यवहार करता है तो परिणाम भयानक होते हैं। पराली जलाने से हम सल्फर जैसे तत्व भी नष्ट कर देते हैं, जो इस प्राकृतिक सल्फर उर्वरक से हम अपने खेतों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। पराली वाले खेतों में जुताई करने से गेहूं की पैदावार बढ़ती है। उन्होंने बताया कि एक टन पराली जलाने से मिट्टी और पोषक तत्वों का बड़ा नुकसान होता है अगर पराली न जलाई जाए तो किसान आर्थिक तौर पर खुशहाल होते है। 10 क्विंटल पराली से 5.5 किलो नाइट्रोजन, 2.3 किलो फासफोरस फासफोर्स, 25 किलो पोटैशियम, डेढ़ किलो गंधक व 4 सौ किलो जैविक कार्बन प्राप्त होती है। जबकि जमीन में पराली मिलाने से उपरोक्त तत्व आसानी से मिलते हैं। जिसका फायदा फसल के झाड़ पर मिलता है। पराली जलाने की बजाए इसे जमीन में मिला दिया जाए तो फसल के झाड़ पर 10 से 15 फीसद अच्छा असर होता है। पराली को आग लगाने से निकलने वाली गैसों का मनुष्य सहित वातावरण में भी दुष्प्रभाव पड़ता है। सरकार किसानो के लिए सुपर सीडर, हैपीसीडर, मल्चर इत्यादि महंगी मशीनें किसानों को सब्सिडी पर मुहैया करवा रही है। पराली की आग से खेती की उपजाऊ क्षमता कम होती है। खेत में पराली जलाने से खेतों की मिट्टी में केंचुआ समेत कई तरह के जीव जंतु रहते हैं जो मिट्टी की उर्वरा क्षमता और गुणवत्ता को लगातार बढ़ाते हैं, लेकिन खेत में पराली जलाने की गर्मी से वे मर जाते हैं। ऐसे में मिट्टी की उर्वरा क्षमता लगातार गिरती रहती है। इसलिए अगर मिट्टी की क्षमता को बनाए रखना है, तो पराली जलाना बंद कर देना चाहिए। क्योकि इससे जल और जमीन दोनों प्रदूषित होता है। उन्होंने किसानो से अपील की कि वह आधुनिक मशीनों का प्रयोग कर गेंहू की बिजाई करें तथा धान की प्रालि को न जलाकर अपने आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करें।

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