रक्षा मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने कहा है कि चीन के साथ सैन्य और कूटनीतिक रूप से बातचीत जारी है। इस बातचीत का परिणाम अब तक सकारात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत भारत की अखंडता और गरिमा पर कोई समझौता नहीं होगा। राजनाथ  सोमवार को महाराष्ट्र जन संवाद वर्चुअल रैली को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि हम किसी के मान, सम्मान पर न चोट पहुंचाते हैं और न अपने मान, सम्मान और स्वाभिमान पर चोट बर्दाश्त कर सकते हैं, ये हमारा चरित्र रहा है। उन्होंने कहा कि इसलिए मैं विपक्ष को कहता हूं कि भारत-चीन मामले पर हमें ज्यादा समझाने की कोशिश मत कीजिए। राजनाथ सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि मैं राहुल गांधी जी को कहना चाहूंगा कि हाथ में दर्द हो तो दवा कीजिए, यदि हाथ ही दर्द हो तो क्या कीजिए।

भारत की अखंडता और गरिमा को लेकर जो बात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही उसका स्वागत है लेकिन धरातल का सत्य यह है कि चीन, पाकिस्तान, नेपाल हमारे तीनों पड़ोसी देश भारत की अखंडता व गरिमा को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती दे रहे हैं। कश्मीर घाटी में पिछले एक माह में 100 के करीब आतंकियों को ढेर करना और सैकड़ों सीमा से घुसपैठ करने की तैयारी में हैं यह तथ्य ही दर्शाते हैं कि पाकिस्तान घाटी में शरारत कराना और हिंसा फैलाने के लिए दिन-रात एक कर रहा है। चीन के सुर में सुर मिलाकर नेपाल भी भारत को सीमा विवाद खड़ा कर चुनौती दे रहा है। नेपाल की चीन के साथ बढ़ती दोस्ती तथा नेपाल का चीन को हर नीति पर समर्थन देना दर्शाता है कि नेपाल चीन के हत्थे चढक़र भारत की अखंडता व गरिमा को चुनौती दे रहा है। चीन अपने आप में एक बड़ी ताकत है और भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। चीन एक तरफ सीमा विवाद को लेकर बातचीत कर रहा है, दूसरी तरफ भारत के साथ लगती सीमा पर अपनी सैनिक गतिविधियों को बढ़ाता चला जा रहा है।

चीन, पाकिस्तान व नेपाल भारत के पड़ोसी देश हैं और तीनों भारत की भावनाओं को अनदेखा कर ऐसी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं जो भारत की अखंडता व गरिमा को चुनौती देती दिखाई दे रही है। उपरोक्त तीनों देशों के साथ-साथ विदेशों में बैठे व भारत विरोधियों की कठपुतली बने कई संगठन भारत की अखंडता को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री व रक्षा मंत्री एक बार नहीं अनेक बार भारत के जन को आश्वासन दे चुके हैं कि भारत अखंडता व गरिमा को बनाये रखने के लिए कृतसंकल्प है तथा कोई भी कदम उठाने को तैयार है और किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। भारत की अखंडता को मिल रही चुनौतियों को देखते हुए ही देश के प्रधानमंत्री ने आस्ट्रेलिया के साथ सैन्य समझौता किया। इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य अड्डों का इस्तेमाल कर सकेंगी। अमेरिका, फ्रांस, रूस व अन्य देशों के साथ जो समझौते सुरक्षा की दृष्टि से किए गए थे उस पर भारत कायम है और समझौतों अनुसार कार्य जारी है।

कोरोना महामारी फैलाने के मामले में जिस तरह चीन कटघरे में खड़ा है उसको देखते हुए विश्व की नजर विकल्प के रूप में भारत पर टिकी है। भारत ने भी बड़ी कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करने हेतु अपनी नीतियों में बदलाव किया है। भारत तभी अखंड रह सकेगा जब राजनीतिक, आर्थिक व सैन्य दृष्टि से मजबूत होगा। चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर जो रुख भारत ने अपनाया है उससे स्पष्ट है कि भारत ने अपनी कम•ाोर छवि को तोड़ते हुए एक मजबूत देश की तरह बर्ताव करना शुरू किया है। भारत जब आंतरिक स्तर पर राजनीतिक, सैनिक व आर्थिक दृष्टि से मजबूत होगा तभी भारत की अखंडता व गरिमा बनी रहेगी। भारत की अखंडता व गरिमा को चुनौती देने वाले भारत के बाहर और अन्दर भी बैठे हैं, इस बात का ध्यान रखते हुए प्रत्येक भारतीय को सतर्क रह कार्य करना होगा। सरकार को सीमाओं पर विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। आंतरिक स्तर पर स्वराज्य और आत्मनिर्भर के मूल मंत्रों को समझ कर कार्य करने में ही भारत की अखंडता व गरिमा बनी रहेगी। यह बात प्रत्येक भारतीय को अपने दिलो दिमाग में बैठा लेनी चाहिए।

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